गर्भवती महिलाओ में नार्मल डिलीवरी के लिए दादी माँ के नुस्खे।

नार्मल डिलीवरी के लिए दादी माँ के नुस्खे: हर स्त्री के जीवन का सपना होता है मां बनना, गर्भवती होना। गर्भधारण करने के बाद हर मां के मन मे यही विचार आता हैं कि उसका बच्चा स्वस्थ हो और डिलीवरी नॉर्मल हो। डिलीवरी से होने वाले दर्द से बचने के लिए कितनी महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी चुनती है लेकिन शरीर और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए नॉर्मल डिलीवरी ही बेहतर होती है। सिजेरियन ऑपरेशन(Caesarean section) से डिलीवरी में दर्द नहीं होता है तो आसान लगती है। नॉर्मल डिलीवरी में दर्द सहना पड़ता है पर बाद में रिकवरी में आसानी होती है।

नार्मल डिलीवरी के लिए दादी माँ के नुस्खे

क्या होती है नॉर्मल डिलीवरी:

सामान्य या नार्मल डिलीवरी में किसी भी प्रकार की सर्जरी नहीं होती। नॉर्मल डिलीवरी मे वजाइना से शिशु का जन्म होता है। किसी भी प्रकार की मेडिकल तकलीफ ना हो तो नॉर्मल डिलीवरी ही बेहतर है। स्वस्थ और युवा महिला को आसानी से नार्मल डिलीवरी हो जाती है।

रिसर्च कहती है कि 85% महिलाओं की नार्मल डिलीवरी होती है ।फिर भी कई बार परिस्थितियां ऐसी हो जाती है कि नॉर्मल डिलीवरी की जगह ऑपरेशन ही करना पड़ता है।

यहाँ कुछ ऐसे नुस्खे हैं जिसका पालन किया जाए तो आसानी से नार्मल डिलीवरी हो सकती है।

स्वस्थ रहें(Stay healthy)

सबसे पहले आप खुद को गर्भधारण के लिए तैयार करें शारीरिक और मानसिक रूप से। कमजोर शरीर में गर्भ धारण करने से बहुत सी तकलीफ बाद में दिखाई देती है। आपके शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए अन्यथा बच्चे के विकास में बाधा आती है। स्वस्थ मां से ही स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है।

आहार (Food)

लगभग सभी घरों में गर्भवती महिलाओं को खाने-पीने संबंधित बहुत से सुझाव दिए जाते हैं। गर्भवती महिलाओ का आहार प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन से भरपूर हो, जंक फूड से परहेज करें, शक्कर व नमक का अत्याधिक सेवन न करें, हरी पत्तेदार सब्जियों और फल अवश्य ले क्योंकि सामान्य डिलीवरी के समय काफी ब्लड लॉस होता है और सिजेरियन में और भी ज्यादा। नियमित अंतराल पर खाते रहे। गर्भवती स्त्रीयो को अपनी डाइट में सिर्फ 300 से 400 कैलोरी ही बढ़ानी है और वह भी हेल्दी (Healthy)चीजों की।

लेकिन ध्यान रहे जरूरत से ज्यादा खाने पर वजन बढ़ने का डर रहता है अतः ध्यान रखें।

टहलना(Walking)

गर्भवती महिलाओं के लिए 20 से 45 मिनट टहलना बहुत जरूरी है ताकि ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहे। टहलने से हम चुस्त व ऊर्जा से भरे रहते हैं। गर्भावस्था में पैदल चलने से निचले हिस्से की मांसपेशियां एकदम लचीली और सामान्य हो जाती है और कोई तनाव नहीं रहता है। भारी काम आप को नुकसान पहुंचा पहुंचा सकता है पर टहलते, हिलते -ढुलते रहे। शारीरिक रूप से सक्रिय रहे।

व्यायाम/योगा और तनाव मुक्त रहें

नॉर्मल डिलीवरी के लिए पहले महीने से व्यायाम या योगा करना आवश्यक है। गर्भावस्था में किसी भी प्रकार के तनाव को व्यायाम से दूर किया जा सकता है। पुराने जमाने में गर्भवती महिलाए घर पर ही दो पाटों वाली चक्की पर आटा पीसती थी, जिससे गर्भवती महिलाओं का व्यायाम हो जाता था। पर अभी यह संभव नहीं है फिर भी हम जितना व्यस्त रखेंगे उतना ही मांसपेशियों में लचीलापन आएगा और प्रसव के समय लाभदायक होगा ।

गर्भवती महिला हमेशा खुश रहें तनाव ना लें। चूँकि इसका सीधा असर बच्चे पर और डिलीवरी पर पड़ता है। गहरी लंबी सांस से खुद को तनाव मुक्त करें। ब्रीदिंग (breathing) मे लमाज(Lamaze) टेक्निक लेबर पेन के वक्त बहुत ही असरकारक है। ब्रीदिंग (Breathing)एक्सरसाइज करते रहे जिससे बच्चे को अच्छे से ऑक्सीजन मिलता रहे। नाक से श्वास ले और मुंह से श्वास छोड़े।

Sumo squatting, duck walk, Kegel exercise, water workouts बहुत ही जरूरी है नॉर्मल डिलीवरी के लिए। Hip raise-कमर दर्द में लाभदायक। Downward dog दर्द में राहत देता है। Squatting से मसल फ्लैक्सिबल होती है। बटरफ्लाई(Butterfly)से पेल्विक एरिया ओपन होती है।
इसके अलावा गर्भवती स्त्रियों के लिए योग क्लासेज भी चलती है आप उसका सहारा भी ले सकती हैं।

पर्याप्त पानी पिए(Water intake)

शरीर में पानी की मात्रा बराबर होने से हर अंग को ऑक्सीजन बराबर मिलता है। डिलीवरी के समय होने वाले दर्द को सहने की ताकत मिलती है। गर्भ में बच्चा एक थैली में रहता है I इस थैली को एमनिओटिक फ्लूइड कहते हैं अतः जरूरी है आठ से दस गिलास पानी पिए।

घर के काम करें(Do household chores)

घर का जितना काम आसानी से हो उतना अवश्य करें। इससे आप सुस्त नहीं रहेगी पर खुद को थकाए नहीं। काम के बीच- बीच में थोड़ा आराम कर ले। ज्यादा देर तक पैरों पर खड़े ना रहे। छह से आठ घंटे की नींद अवश्य ले।

मालिश(Massage)

नियमित रूप से शरीर की मालिश कराएं। मालिश में टी ट्री ऑयल, बेसिल(Basil), मिंट(Mint) जैसे प्राकृतिक(Natural) तेलों का इस्तेमाल करें।

शारीरिक मुद्रा (Posture):

बैठने की मुद्रा पर ध्यान दें. जैसे-जैसे वजन बढ़ता है रीढ की हड्डी पर वजन बढ़ता जाता है। अगर आप सही ढंग से नहीं बैठेंगी तो इससे रीढ की हड्डी में दर्द उत्पन्न हो सकता है।

लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे ना रहे और ना ही खड़े रहे।

ज्यादा देर तक पैरों को नीचे न लटकने दे, इससे पैरों में सूजन आ जाती है। पैरों को मोड़ कर बैठे।

👉नौवा महीना बाकी सभी महीनों से अलग और ज्यादा ध्यान रखने वाला होता है।

नौवें महीने में डाइट

नौवें महीने में अपनी डाइट में पोषक तत्वों की मात्रा को अधिक रखें ,जिससे आपके नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस बढ़ जाएंगे।

हल्दी (Turmeric):

  • कमर ,कूल्हे में हो रहे दर्द को कम करने मैं सहायक ।
  • दूध में हल्दी मिलाकर पीना बहुत ही फायदेमंद है ।
  • अदरक और लहसुन का ज्यादा प्रयोग कर सकते हैं इससे शरीर की तासीर गर्म हो जाएगी

अजवाइन (Carrom seeds):

घर की बड़ी बुजुर्ग महिलाएं गर्भवती को अजवाइन के लड्डू डिलीवरी के पहले भी देती है इससे शरीर को ताकत मिलती है और दर्द सहन करने की शक्ति भी बढ़ती है।

खजूर (Dates):

खजूर खाए और गर्म दूध पी ले या फिर दूध में खजूर उबालकर भी पी सकते हैं।

घी-केसर दूध

नौवां महीना लगते ही केसर +घी+ दूध पीने से सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ जाती है।

कई बार डॉक्टर पपीता और आम (उपलब्ध हो तो ) खाने के लिए कहते हैं ताकि नॉर्मल डिलीवरी आसानी से हो जाए। नौवें महीने में फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन करें- फ्रेश फ्रूट, ड्राई फ्रूट, ओटस(oats) अनाज आदि।

👉गर्भधारण की बात पक्की होने पर किसी अच्छी महिला डॉक्टर से नियमित जांच कराते रहें। ऐसे डॉक्टर चुने जिन्होंने ज्यादा नॉर्मल डिलीवरी करवाई हो।

👉अच्छे लोगों और दोस्तों के साथ समय बिताएं। किताबे पढे ,गाने सुने और मनोरंजन के साथ 9 महीने का समय व्यतीत करें। सकारात्मक सोचे और अच्छे विचार दिमाग मे लाएं ।

👉प्रसव के सभी मामले एक जैसे नहीं होते। फिर भी उपरोक्त दिए गए उपायों से आपको सहायता मिलेगी।

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