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शरीर की गांठों का आयुर्वेदिक उपचार

शरीर की गांठों का आयुर्वेदिक उपचार: यह त्वचा से संबंधित बीमारी है। शरीर का मेटाबॉलिज्म कम होता है तब शरीर की चर्बी जमा हो जाती है। एक जगह जमा हुई चर्बी गांठ का रूप ले लेती है। गांठ को लाइपोमा (Lipoma)भी कहते हैं। सामान्यत: तीन तरह की गांठे होती है। यह टीवी, लाइपोमा व कैंसर है।

लाइपोमा यानी बिना दर्द की चर्बी वाली गांठ है जो किसी भी अंग में बन सकती है और इससे शरीर को कोई तकलीफ नहीं होती है। शरीर में गांठ का होना सामान्य रोग है। ये गांठे छोटी या बड़ी किसी भी साइज की होती है। गांठो की समस्या पुरुषों में ज्यादा होती है।

लाइपोमा क्या है?

लाइपोमा त्वचा के अंदर बनने वाली एक नरम गांठ है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने पर गांठ होती है। वैसे तो गांठ शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है लेकिन ज्यादातर मामलों में गर्दन, छाती, पीठ, कंधा, कुल्हा, जांघ और बांह में होती है। कुछ मामलों में गांठ शरीर के अंदरूनी भागों में भी होती है। हर गांठ कैंसर नहीं होती है। अगर कुछ गांठो मे दर्द या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो विशेषज्ञ से मिलकर इसका उचित इलाज करवाना चाहिए।

आमतौर पर हर एक व्यक्ति को एक से दो गांठे होती है पर किसी- किसी में 4 से 5 या इससे भी अधिक गांठे भी हो सकती है। शरीर में बनने वाली सभी गांठे घातक नहीं होती है। ज्यादातर गांठे चर्बी का एक गोला सा होती है यानी बिनाइन होती है। जिसमें ना दर्द होता है, ना तकलीफ होती है और फैलती भी नहीं।

चर्बी की गांठ की गांठे मुलायम होती है और हिलती है जबकि कैंसर वाली गांठ सख्त होती है और वह हिलती नहीं है। चर्बी की गांठ एक से 3 सेंटीमीटर तक मोटी हो सकती है। जब यह गांठे बड़ी हो जाती है तब ये थोड़ी बूरी सी दिखने लगती है। वैसे तो चर्बी की गांठ का मोटापे से कोई संबंध नहीं है।

लाइपोमा के कारण:

लाइपोमा के होने का सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है। वैसे तो ज्यादातर मामलों में यह अनुवांशिक होता है। अगर परिवार में लाइपोमा की हिस्ट्री रही है तो आपको भी हो सकता है।

इसके अलावा गांठ होने के कुछ संभावित कारण है

👉कई बार मेटाबॉलिक वजह से भी गांठ बन जाती है। यह त्वचा में होने वाले सबसे सामान्य कैंसर है। शरीर की गांठ कैंसर में नहीं बदलती है। एक फीसदी से भी कम मामलों में कैंसर होता है।

👉कुछ गांठे साधारण बीमारी उत्पन्न होने के कारण भी हो जाती है।

👉अगर गांठ के आसपास की त्वचा लाल है, गरम है तो यह एक संक्रमण हो सकता है।

👉कफ प्रकृति वाले लोगों को लाइपोमा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गांठो की जांच:

शरीर के बाहरी अंगों पर गांठे दिखाई देती है पर अंदरूनी हिस्सों में होने वाली गांठो को कुछ टेस्ट के जरिए पता लगता लगा सकते हैं जिसमें एक्सरे(x-ray), एमआईआर(MIR), अल्ट्रासाउंड(ultrasound), सीटी स्कैन(CT scan) आदि तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

शरीर में होने वाली गांठो का आयुर्वेदिक उपचार:

गर्म पानी पिए:

रोज सुबह गर्म पानी पिए।

गोमूत्र अर्क सुबह खाली पेट पिए।

हल्दी (Turmeric):

कचनार:

आटा और शहद का लेप:

यह सबसे आसान, सस्ता और घरेलू उपाय है। एक कटोरी में थोड़ा सा आटा लें। उसमें समान मात्रा में शहद मिला दे। दोनों को मिक्स करके लेप तैयार कर ले। अब इस लेप को गांठों पर लगाए। चाहे तो ऊपर से नैपकिन, रूई आदि से ढक ले। दो से तीन घंटे बाद धो लें। आप इसे ज्यादा देर तक भी रख सकते हैं, कोई हानि नहीं होगी। कुछ ही दिनों में फर्क दिखाई देने लगेगा।

क्रौंच के बीज:

गांठ वाली जगह पर क्रौंच के बीज को घिस कर दो- तीन बार लेप करें।

गिलोय:

अगर शरीर में बहुत अधिक गांठे हैं तो शिला सिंदूर 4 ग्राम प्रभाल पिष्टी 10 ग्राम के साथ मोती और गिलोय मिलाकर साठ पुड़िया बना लें। इसे सुबह-शाम खाए। इसके सेवन से गांठ से निजात मिल जाती है। एक से तीन महीने में पूर्ण रूप से आराम मिलता है।

आकडे या मदार का दूध:

शरीर के किसी भी हिस्से पर होने वाली गांठ में यह लेप बहुत ही फायदेमंद है। आकडे के दूध में मिट्टी को मिलाएं और लेप को उभरी हुई गांठ पर लगाए। नियमित रूप से लगाने पर दर्द के साथ गांठ हटाने में भी मदद मिलेगी।

👉अरंडी के बीज और हरडे समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसे नई गांठ पर बांधने से वह बैठ जाएगी और लंबे समय की पुरानी गांठ होगी तो पक जाएगी।

👉निर्गुंण्डी का 20 से 25 मिलीलीटर काढा ले उसमें 1 से 5 मिलीलीटर तक अरंडी का तेल मिला ले। दोनों को अच्छी तरह से मिला ले और पी ले। इस मिश्रण के सेवन से गांठ ठीक हो जाएगी।

👉काले अडूसे के पत्तों का रस तेल में मिलाकर गांठो पर लगाने से गांठ रोग में लाभ होता है।

👉फरहद के पत्तों का पेस्ट गांठ पर लेप करें, बहुत लाभ मिलेगा।

👉गोरखमुंडी के पंचांग (फल, फूल, जड़, तना, पत्ती)का रस 10 से 20 मिलीलीटर रोज सुबह-शाम सेवन करने से गांठ नष्ट हो जाती है।

👉कचनार 10 ग्राम, बहेड़ा और त्रिकुटा 20-20 ग्राम ले। सब मिलाकर पाउडर बना लें। 1 ग्राम पाउडर और 1 ग्राम शहद के साथ चटा दे। गांठ में आराम मिलेगा।

चूना:

पान में खाए जाने वाला चूना कनक के दाने के बराबर पानी में घोलकर या दही में घोलकर पी लीजिए। गांठ निकल जाएगी।

👉बच्चों की गर्दन में गांठ हो जाती है यह कफ के कारण भी हो सकती है। आहार मे घी देना बंद कर दे। एक महीने तक लौ फेट दूध के साथ हल्दी डालकर दे, लाभ मिल जाएगा।

परहेज करें:

👉उड़द की दाल, अरबी, राजमा, चावल को खाने में कम मात्रा मे ले।

👉पेट में छोटी गांठ है तो उन लोगों को थोड़े दिनों के लिए घी और दूध बंद कर देना चाहिए।

👉तला हुआ और जंक फूड कम खाएं: मैदा और तेल से बने हुए खाद्य पदार्थ शरीर में चर्बी को बढ़ाते हैं और किसी भी हिस्से में एकत्रित होते हैं और गांठ का रूप ले लेते हैं। तला और जंक खाद्य पदार्थों से परहेज करें। यकीन ना हो तो 1 सप्ताह तक तली, मेंदे वाली चीजें खाए तो आप देखेंगे आप की गांठ और बड़ी हो गई है। फर्क सामने है अतः बाहर की तली भुनी चीजे और जंक फूड कम खाए।

योग:

गांठ से निजात पाने के लिए हम आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ जीवन शैली में भी कुछ परिवर्तन करेंगे।

योगासन:

शरीर के बाहरी हिस्सों में बनी हुई गांठो के लिए योगासन बहुत जरूरी है।

सूर्य नमस्कार:

सूर्य नमस्कार एक प्राकृतिक थेरेपी है। जिससे कैंसर की गांठ को भी निकाला या पिघलाया जा सकता है। सूर्य नमस्कार से शरीर को ऊर्जा मिलती है।

मंडूकासन:

पेट की गांठो के लिए मंडूकासन बहुत ही लाभदायक है

प्राणायाम:

शरीर के अंदरूनी भागों में बनी हुई गांठो के लिए प्राणायाम बहुत ही लाभकारी है।

कपालभाति:

प्रारंभ में कपालभाति 10 से 15 मिनट तक करें। फिर आधा घंटा तक करें। इससे एक महीने के अंदर गांठ खत्म हो सकती है। अल्सर, लिवर सिरोसिस वाले धीरे-धीरे प्राणायाम करें।

अनुलोम विलोम:

अनुलोम -विलोम से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है जिससे गांठ को पिघलने में मदद मिलती है

दौड़ना ( Running):

शरीर में किसी भी जगह एकत्रित चर्बी /वसा ही गांठ का रूप लेती है सुबह जब हम दौडते हैं तो चर्बी पिघलना शुरू हो जाती है। जैसे -जैसे शरीर में चर्बी/ फैट कम होगी, गांठ छोटी होती चली जाएगी। दो महीने तक रोजाना 5 से 10 मिनट दौड़ेंगे तो यह गांठ बिल्कुल पिघल कर गायब हो जाएगी।

शरीर में उभरी हुई गांठो का उपरोक्त दिए हुए आयुर्वेदिक इलाज करें, लाभ पहुंचेगा। पंचकर्म, शोधन वस्ती उपचार के अलावा गांठ पर औषधियों का लेप भी फायदेमंद है। बहुत लंबे समय तक गांठो के बने रहने से व्यक्ति में तनाव रहने लगता है। अगर आप अपनी त्वचा में कोई बदलाव अनुभव करें या शरीर पर कोई गांठ या सूजन देखते हैं तो जांच अवश्य कराएं।

बहुत ही दुर्लभ मामलों में गांठ एक प्रकार का कैंसर हो सकती है जिससे लिपोसरकोमा कहते हैं और बहुत तेजी से बढ़ता है। विशेषज्ञ से जांच कराए बिना किसी नतीजे पर ना पहुंचे।

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