गर्भावस्था के दौरान क्या गर्भ मे बच्चे सीखना शुरू करते है?

गर्भावस्था(Pregnancy):

एक लडकी से मां बनने के बीच का सफर गर्भावस्था कहलाता है।हम सभी जानते है कि हम जन्म लेने से पहले मां के गर्भ मे नौ महीने का समय व्यतीत करते है।गर्भावस्था मे बच्चे के मन और मस्तिष्क मे बहुत सारी जानकारी पहुँचती है जिसे वो ग्रहण करता है,सीखता है। गर्भावस्था एक ऐसा समय जब हर मां भगवान से दिव्य संतान के लिए प्रार्थना अवश्य करती है।

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गर्भावस्था में सीखने का इतिहास:

कौन भूल सकता है अभिमन्यु के उदाहरण को,बड़े-बड़े वीर योध्दा चक्रव्यूह को भेद नही पाए लेकिन अभिमन्यु जैसे बाल योध्दा ने उसे भेद दिया क्योंकि गर्भकाल मे ही उन्हे चक्रव्यूह भेदने का ज्ञान मिल गया था।

गर्भावस्था मे होने वाली जिज्ञासाओ का समाधान:

मां का गर्भ बच्चे के लिए किसी स्कूल से कम नही होता। फिर भी प्रश्न मन मे आ ही जाता है- “क्या वाकई मे बच्चे ,मां के गर्भ मे रहते हुए बहुत सी बाते सीखता है?” वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब “हां” मे देते है- मां का गर्भ बच्चे के लिए एक सेसंरी प्ले फील्ड जैसे होता है। गर्भ मे बच्चा बहुत कुछ सीखता रहता है जैसे खानपान, आवाज, स्वाद, इमोशंस आदि।

खान-पान:

साबुत अनाज, दाले, मेवे, हरी सब्जिया, फल, डेयरी प्रोडक्टस आदि भोजन मे जरूर शामिल करे।

गर्भावस्था मे मां को कोई चीज ज्यादा पसंद आती है और कोई चीज बिल्कुल भी नही। इसमे सिर्फ मां की ही नही बच्चे की पसंद- नापसंद भी शामिल होती है।इसका मतलब मां की खानपान की आदत बच्चे गर्भ मे ही सीख जाते है और उनकी भी खाने-पीने मे रूचि वैसी ही होती है। अलग-अलग रंग वाले फल एवं सब्जियो को ज्यादा ले जिससे बच्चे को भी फल एवं सब्जिया पसंद आए।

आहार मे आयोडीन का स्तर कम न होने दे।आयोडीन भोजन से मिलने वाला ऐसा खनिज है जो शिशु के मस्तिष्क विकास मे बहुत जरूरी है।
पानी एवं अन्य पौष्टिक तरल पदार्थो का सेवन करे, जिससे कब्ज, बवासीर और मूत्र संक्रमण से बच सके।फलो एवं सब्जियो के रस की जगह सलाद का प्रयोग करे ताकि फाइबर पर्याप्त मात्रा मे मिल सके।

आपको भूख नही लगी हो, तो भी हो सकता है शिशु भूखा हो,इसलिए कोशिश करे नियमित अंतराल पर कुछ-न-कुछ खाती रहे। ध्यान रहे स्वस्थ शरीर से ही स्वस्थ शिशु का जन्म होता है ।

आवाज:

माता-पिता की आवाज को बच्चे ज्यादा समझते और पहचानते है।इससे ही वो अपनी बोली/भाषा सीख लेते है।गर्भ मे पल रहे बच्चे से रोज बातचीत की जाए तो आपकी क्रिया पर बेबी बंप मे किक (kick )मारकर प्रतिक्रिया भी देते है।बातचीत से माता की भावनाए भी बच्चे तक पहुंचती है। माता-पिता और बच्चे के बीच Strong Bonding तैयार होती है।

गर्भावस्था के दौरान मां किसी खास तरह का गीत-संगीत सुनती है तो पैदा होने पर बच्चा उस आवाज को आसानी से पहचान लेता है।

इंसान ही नही अन्य जीवो के बच्चे भी पैदा होने से पहले ही स्वाद,खूशबू, आवाज को पहचान लेते है और कई गुण भी जन्मजात आ जाते है।

कहानिया सुनाए:

बच्चे को गर्भ मे ही गर्भसंस्कार दिए जाते है।उन्हे महापुरुषो की प्रेरणादायक कहानिया सुनाते है। यदि कोई खास हुनर सिखाना हो तो उसके बारे मे बातचीत करने से बच्चा बहुत कुछ सीख जाता है।

सुनने की आदत से निप्पल चूसने की प्रक्रिया मे तेजी आती है।

भावनात्मक असर:

गर्भस्थ महिला को परिवार जन हमेशा खूश रखते है उन्हे किसी भी तरह से रोने या मायूस नही होने दिया जाता। अच्छी भावनाए गर्भस्थ शिशु के विकास मे सहायक होती है।

एक्सरसाइज:

गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने के कई फायदे है।व्यायाम शिशु के शारीरिक विकास मे मदत करता है व मां की प्रसव पीड़ा को भी कम करता है।
पैदल चलना (Walking) गर्भावस्था मे आदर्श व्यायाम है।सुबह-शाम टहलने से ताजा हवा से एकदम फ्रेश फिलीग होती है। और चिंता, अवसाद (depression) की भावनाओ से छुटकारा मिलता है।

नियमित व्यायाम से अच्छे हार्मोंस रिलीज होते है। ब्लड सर्कुलेशन बराबर होता है और शरीर मे हल्केपन का अनुभव होता है।इससे शिशु की Memory & Learning Power तेज होती है।

ध्यान दे- व्यायाम/आसन के दौरान खुद को बहुत ज्यादा न थकाए। जितना सहजता से हो उतना ही करे।

पौष्टिक आहार:

अपने आहार मे सभी तरह के मौसमी फल एवं सब्जियो का समावेश करे।विटामिन डी की कमी न हो ,ध्यान रखे।डेयरी प्रोडक्टस B-12 से भरपूर होते है इनका सेवन जरूर करे।आयरन और मिनरल्स बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास मे अहम भूमिका निभाता है।

आज मां के पेट मे बच्चो की शिक्षा शुरू हो गई है।वे विज्ञान और गणित सीख रहे है।विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओ के माध्यम से गर्भस्थ शिशु को पढा रहे है ताकि पैदा होते ही वह दूसरे बच्चो से बेहतर हो।गर्भवती महिलाए इसे लेकर उत्साहित है,और सेन्टर्स का सहारा ले रही है।बडे अक्षर, विज्ञापन, गणित, Behavior, अलग-अलग भाषाए इन सेन्टर्स मे सिखाए जाते है। जिससे उम्र के मुताबिक उसका अटेंशन और फोकस बाकी बच्चो से ज्यादा हो। बच्चो मे किसी भी phobia या Skill के लिए डर नही रहता।

यह भी पढ़े:

भारतीय परंपरा मे गर्भावस्था के दौरान मां को अच्छी किताबे पढ़ने और अच्छा सोचने के लिए कहा जाता है।क्यूंकि उसका असर बच्चे पर होता है।
अपने गर्भकाल को “एक सफर खुशियो का बनाए”। टेन्शन ना ले।आप से बच्चा नौ महीने कुछ-कुछ सीखता ही रहता है।

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