पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण क्या है?

पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण क्या है: पेट के निचले हिस्से में दर्द का मतलब आपकी नाभि के नीचे दर्द होता है। पेट के निचले हिस्से को पेडू या पेल्विस कहा जाता है। अक्सर पेट में होने वाले दर्द को कब्ज, गैस या पाचन समस्या से जोड़ा जाता है लेकिन हमेशा ऐसा नहीं करना चाहिए। कभी भी इस नए या अनचाहे दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेट के निचले भाग में मूत्राशय, गर्भाशय और अंडाशय होते हैं जो शरीर के महत्वपूर्ण अंग है।

पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण क्या है

पेट के निचले हिस्से में दर्द का मतलब किसी अंग या आसपास की हड्डियों और मांसपेशियों में होने वाला दर्द है। दर्द ज्यादा एवं लंबे समय तक हो तो डॉक्टर से जांच आवश्यक है। आपकी छोटी आंत, बड़ी आंत और मलाशय से भी पेट के निचले हिस्से में होते हैं। इन अंगों में होने वाली परेशानी पेट दर्द के रूप में सामने आती है।

पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण:

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सामान्यतया पुरुषों और महिलाओं दोनों में पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण निम्नलिखित होते हैं:

  • बड़ी आत मे सूजन(Diverticulitis)
  • कब्ज
  • किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी
  • इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम
  • आंत मे रुकावट
  • गुर्दे की पथरी
  • आंत का कैंसर
  • पेरिटोनायटिस (पेट की अंदरुनी परत पर संक्रमण)
  • अपेन्डिक्स(Appendix)

इसके अलावा बहुत सारी ऐसी वजह होती है जो सिर्फ महिलाओं या सिर्फ पुरुषों में ही पेट के निचले हिस्से मे दर्द का कारण होती है।

महिलाओ में पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण:

महिलाओ में पेडू का दर्द(Pelvic pain in women):

महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान पेडू दर्द सामान्य समस्या है। अगर दर्द की समस्या 6 महीने से ज्यादा समय तक रहती है तो यह पेल्विक कंजेक्शन सिंड्रोम(Pelvic congestion syndrome) यानी पीसीएस हो सकता है। देश में हर 3 में से एक महिला पेडू के दर्द से गुजरती है। कई बार यह दर्द थोड़े समय मे अपने आप चला जाता है। पर लंबे समय तक रहने वाले दर्द की जांच अवश्य करावे। पेडू का दर्द एक स्थान पर हो सकता है या एक से दूसरे स्थान पर भी जा सकता है। पेट और जांघ के बीच से शुरू होने वाला दर्द बढ़ते- बढ़ते कुल्हो तक भी महसूस किया जा सकता है। महिलाओं में अंडाशय की गांठ के कारण भी पेडू का दर्द होता है।

पेडू में दर्द के लक्षण:

  • पेशाब में खून आना
  • पेशाब से बदबू आना
  • पेशाब करते समय जलन होना
  • कब्ज या दस्त
  • मासिक धर्म के दौरान ऐठन या दर्द
  • पेट फूलना या पेट में गैस होना
  • बुखार
  • असुरक्षित यौन संबंध या संबंध बनाते समय दर्द होना
  • लंबे समय तक खड़े होने या बैठने में दर्द महसूस होना

पेडू के दर्द का सही कारण जानने के बाद ही इलाज तय होता है। इसके लिए सामान्य रूप से ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि करवाया जाता है और दर्द के लक्षणों को दूर करने की दवाई दी जाती है।

फिर भी बहुत से ऐसे कारण जिम्मेदार है पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के:

गैस्ट्रोएन्टराइटिस(Gastroenteritis (Stomach Flu):

गैस्ट्रोएन्टराइटिस को सामान्य भाषा में पेट का फ्लू कहते हैं। यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से होता है। इसकी वजह से पेट और आंतों पर सूजन और जलन होती है और नाभि में दर्द भी होता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ -साथ उल्टी, भूख न लगना, बुखार, जी मिचलाना आदि लक्षण भी दिख सकते हैं।

उपाय :

इस तरह की समस्या में ज्यादा पानी पीने की जरूरत होती है और आहार पर भी ध्यान देना होता है।

हर्निया(Hernia):

हर्निया की वजह से पेट और कमर दोनों जगह दर्द हो सकता है। पेट के आसपास उभार और सूजन भी हो सकती है ।तकलीफ ज्यादा हो तो समय पर इलाज करवाएं।

माहवारी के कारण :

वैसे तो सभी महिलाओं को माहवारी के दौरान हल्का दर्द होता है और माहवारी के साथ चला भी जाता है। लेकिन तेज दर्द माहवारी के बाद भी बना रहे या पेट में काफी दर्द हो तो इस स्थिति को बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। इसे पेल्विक पेन( Pelvic pain) भी कहा जाता है।

मूत्र नली के संक्रमण (Urinary Track Infection):

यूटीआई की वजह से पेट में दर्द होना महिलाओं में एक आम बात है। पेशाब करने के समय जलन, खुजली, दर्द इत्यादि की परेशानी होती है। ज्यादा संक्रमण होने पर दर्द कमर तक भी जा सकता है।

कब्ज:

महिला या पुरुष किसे भी कब्ज की वजह से पेट में दर्द या असहजता महसूस होती है। शरीर में पानी की कमी और जंक फूड की वजह से भी कब्ज की शिकायत होती है।

उपाय:

पानी और तरल पदार्थों के सेवन की मात्रा बढाए। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ दलिया, ओट्स, फल एवं हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। रोजाना एक्सरसाइज करने से रक्त संचार अच्छा रहता है और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। कैल्शियम रिच फूड, खट्टे फलों का सेवन लाभकारी है।

किडनी की पथरी:

किडनी में पथरी की वजह से आंते प्रभावित होती है। इससे पेट के निचले हिस्से में काफी तेज दर्द होता है। पथरी होने की स्थिति में दाएं या बाएं तरफ दर्द होता है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी (अस्थानिक गर्भावस्था – Ectopic pregnancy):

कभी-कभी अंडा बच्चेदानी की आने की जगह कही और अटक जाता है। जिससे एक्टोपिक गर्भावस्था होती हैं।

गर्भपात(miscarriage):

गर्भावस्था के 20 सप्ताह से पहले मिसकैरेज होने से भी दर्द होता है। यह अवस्था गर्भावस्था के पहले कुछ हफ्तों के भीतर होती है। आप यह भी नहीं जान पाते कि आप गर्भवती हैं।

पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज(Pelvic inflammatory disease):

महिलाओं के प्रजनन संबंधी क्षेत्र(अंगो) में सूजन या यौन संचारित संक्रमण(STD – Sexually transmitted disease) से पेट के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव होता है। इसके साथ और भी कई लक्षण दिखाई देते हैं।

अंडाशय में गांठ:

अंडाशय में उपस्थित यह गांठ मुडती है या टूटती है तो दर्द होता है।

गर्भाशय फाइब्रॉएड:

फाइब्रॉइड गर्भाशय की दीवार पर मौजूद ट्यूमर होते हैं। बड़े फाइब्राएड से पेडू पर दबाव या दर्द हो सकता है।

ओवेरियन सिस्ट(Overian cyst):

सिस्ट के कारण पेट में दबाव, सूजन या दर्द हो सकता है। यदि सिस्ट फट जाती है तब अचानक ही गंभीर दर्द पैदा कर सकता है। इससे अनियमित महावारी होती है।

✅पुरूषो मे नसबंदी के बाद पेट के निचले भाग मे दर्द हो सकता है।

✅यौन संबंध बनाते समय सावधानी बरते और कंडोम का प्रयोग करे।

✅यदि आपको ज्यादा दर्द हो रहा है तो इसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर को सूचित करें।

✅स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए हमेशा रूटीन चेकअप करवाएं ।

✅स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दें।

कुछ घरेलू उपाय जिनसे आप पेट के निचले हिस्से में हो रहे दर्द से आराम पा सकते हैं:

  • गर्म पानी की सिकाई करें
  • आराम करें/ लेट जाए
  • अदरक वाली चाय पीने से सूजन और दर्द कम होता है। और राहत मिलती है।
  • अजवाइन के सेवन से भी राहत मिलती है।
  • कलौंजी का सेवन पेडू के दर्द में बहुत ही लाभदायक है और सूजन से भी राहत देता है।
  • परहेज करे: मैदे से बने खाद्य पदार्थ और जंक फूड से परहेज करें। तंबाकू, शराब का सेवन न करें। कॉफी कम करें।

महिला और पुरुष दोनों की पेट के निचले हिस्से मे दर्द की समस्याए अलग -अलग होती है, इसलिए महिला और पुरुष में दर्द के कारण भी अलग होते -होते हैं। सही कारण का पता लगाएं और उपचार करें।

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