9 महीने के बच्चे का विकास और वजन कितना होना चाहिए

9 महीने के बच्चे का वजन कितना होना चाहिए: समय कितना जल्दी बीत जाता है, कल आप गर्भावस्था के 9 वे महीने में थी और आज देखो बच्चा नौवें महीने में प्रवेश कर रहा है। और तीन महीने बाद एक साल का हो जाएगा। है ना,खुशी की बात। 9 वे महीने में आपका शिशु पहले से कहीं ज्यादा चुस्त और नटखट हो गया है। घुटनों के बल चल कर पूरे घर में भागना सीख रहा है, तरह-तरह की आवाजें निकाल रहा है आदि नटखट क्रियाए देखने को मिल रही है। इन सभी चीजों से हमें लगता है बच्चे का विकास सही ढंग से हो रहा है।

9 महीने के बच्चे का वजन कितना होना चाहिए

फिर भी हर मां को यही डर लगा रहता है कि शिशु का विकास बराबर है या नहीं और वजन कम तो नहीं। जब भी डॉक्टर के पास जाती है और वजन के बारे में पूछते हैं तो डॉक्टर भी शिशु के जन्म के समय का वजन ही पूछते हैं और उसी अनुसार बताते हैं कि बच्चे का विकास और वजन सही है या कुछ सुधार की आवश्यकता है ।

9 महीने के बच्चे का वजन कितना होना चाहिए

जन्म के समय शिशु का सामान्य वजन 2:50 किलो से 3:50 किलोग्राम के बीच होना चाहिए। नौ महीने यानी फुल टर्म में पैदा हुए 80 परसेंट बच्चों का वजन इतना ही होता है। नौ महीने का होते-होते शिशु का वजन, जन्म के समय के वजन की तुलना में दोगुना या इससे ज्यादा हो जाता है। सामान्यतः नौ महीने के बेबी ब्वॉय(baby boy) का वजन 7 से 10 किलो के बीच और बेबी गर्ल (baby girl) का वजन 6 से 10 किलो के बीच होता है।

9 महीने के बच्चे का वजन कितना होना चाहिए

वैसे तो हर शिशु का शारीरिक विकास अलग-अलग तरह से होता है। लेकिन फिर भी आपको अपने बच्चे के वजन में जरूरत से ज्यादा कमी या बढ़ोतरी दिखे तो अपनी पीडियाट्रिशियन(pediatrician) से जरूर संपर्क करें।

नौ महीने के बच्चे की लंबाई:

9 वे महीने के बेबी बॉय की लंबाई लगभग 72 सेंटीमीटर और बेबी गर्ल की लंबाई 70 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

अपने बच्चे के वजन और लंबाई का चार्ट जरूर बनाए जिससे इनके विकास की बराबर जानकारी मिलती रहे। बच्चे का वजन Bone mass पर भी डिपेंड(depend) होता है।

नौ महीने के बच्चों में मानसिक शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं उनकी वजह से वह अलग – अलग तरह की गतिविधियां करना शुरू कर देते हैं। आइए नौ महीने के बच्चे को हम थोड़ा और अच्छे से जानते है-

9 महीने के बच्चे की गतिविधियां:

इशारों की नकल करना :

जैसा बड़े करते हैं उसे दोहराने की कोशिश शुरू कर देते हैं। जैसे अगर किसी ने बाय-बाय कहा तो वह वापस उन्हें हाथ हिलाकर बाय- बाय करने की कोशिश करते हैं।

आवाज निकालना :

बच्चे दूसरों की आवाज सुनकर आवाज निकालना शुरू कर देते हैं। कभी-कभी ‘मां’ ‘बाबा ‘जो एकदम झट से आ जाए वह शब्द को पकड़ लेते हैं और दोहराना शुरू कर देते हैं।

लुका छुपी(hide and seek):

बच्चे को लुका- छिपी खेलना बहुत पसंद है। अपने मुंह के आगे हाथ रखकर भी हाथ हटाए तो बच्चो को बहुत अच्छा लगता है। यह उनका पसंदीदा गेम है।

‘न’ की समझ सीख जाते हैं:

मां अपने बच्चे को कुछ करने से मना करती है तो सिर्फ ‘न’ या ‘No’ कहती है तो उसकी वजह से बच्चा समझ जाता है कि यह चीज मुझे नहीं करना है और वह उस चीज को दोबारा हाथ लगाने से पहले सोचता और मां की तरफ देखता है।

चीजो को मुँह मे डालना:

बच्चा हर एक चीज को मुंह में डालता हैं। ध्यान रखें कहीं छोटा कोई ब्लॉक या ऐसी कोई चीज उसे नुकसान ना पहुंचा दे। खिलौने खरीदते वक्त भी इसका ध्यान रखना जरूरी है।

रंग बिरंगी किताबे देखना शुरू कर देता है:

रंगीन किताबे है जिसमें कार्टून, खिलौने, पक्षी आदि के फोटो होते है, वह उसे पसंद करता है, और बहुत ध्यान से देखता है।

चीजों को फेंकना (throw):

बच्चा चीजो को फेंकना शुरू कर देता है, दीवार पर मारना शुरू कर देता है ,खासकर बॉल। जब भी वह बॉल फेंके और हम उसे उठा कर देंगे तो वह यही प्रक्रिया बार-बार करने लग जाता है और उसे मजा आता है।

घुटनों के बल चलना शुरू कर देता है(crawling):

घुटनों के बल चलने और घर के हर कोने पर पहुंचने की उसकी कोशिश शुरू हो जाती है।

बिना किसी सहारे बैठना:

रीढ की हड्डी के मजबूत हो जाने से वह बिना किसी सहारे के बैठना शुरु कर देता है।

पकडना(grasping)सीख जाता है:

  • चीजों को पकड़ना शुरू कर देता है। वह पहली उंगली और अंगूठे के माध्यम से कोई भी चीज पकड़ने की शुरुआत करता है और एक हाथ से दूसरे हाथ तक ले जाने की कोशिश भी शुरू हो जाती है।
  • कंधों और हाथों का प्रयोग भी शुरू कर देता है।

अजनबी लोगो की पहचान:

करीबी लोगों के पास दौड़कर जाना या उनकी तरफ इशारे करने लगता है और अजनबी लोगों को देखकर रोना, डरना या नहीं जाना वैसे परिवर्तन उसके स्वभाव में देखने को मिलते हैं।

पसंदीदा खिलौना(favorite toy):

इस उम्र में कुछ-कुछ खिलौने बच्चों को बहुत ज्यादा पसंद होते हैं, उन्हें आकर्षित करते हैं और वह जब भी रोते हैं हम उन्हें वह खिलौने दे तो चुप भी हो जाते हैं।

गाना या कविता(rhymes):

बच्चों को गाना या कविताएं सुनने में बहुत मजा आता है। ताली बजाने और गाना सुनते ही कितने ही बच्चे नाचना शुरू कर देते हैं और कविता सुनने पर उसी तरह से बोलने की क्रिया यानि लिपसिंग(lipsing) चालू कर देते हैं।

👉बच्चों को हमेशा सोफे या बेड पर ही ना खेलने दे। जमीन पर भी खेलने दे बस ध्यान रखें फर्श (floor)साफ हो।

9 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है:

  • बच्चों के दूध पीने की शक्ति उसकी सेहत और भूख पर निर्धारित होती है। 9 महीने के बच्चों को 887 मिली से 946 मिली तक पिला सकते हैं। बच्चा हेल्दी है तो थोड़ा ज्यादा भी पी सकता है, और कमजोर है तो थोड़ा कम भी पी सकता है।
  • वैसे तो 6 महीने के बाद बच्चे ऊपर का खाना शुरु कर देते हैं। इसलिए दूध की जरूरत कम या ज्यादा भी हो सकती है।

नींद (sleep):

छोटे बच्चो के लिए 12 से 16 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।

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