मन को खुश रखने के उपाय, अपनाये ये 10 आसान तरीके

"मन के हारे हार है,
 मन के जीते जीत,
 कहे कबीर हरि पाइए,
 मन ही की परतीत।"

इस दोहे के माध्यम से कबीर जी कहना चाहते हैं- जीवन में जय और पराजय केवल मन के भाव है यानी जब हम किसी कार्य के शुरू में ही हार मान लेते हैं तो हम सचमुच में ही हार जाते हैं। पर जब हम यह मान लेते हैं कि हम जीत जाएंगे तो हम जीत जाते हैं और खुशी का अनुभव होता है।

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सबसे पहले यह जानते हैं कि खुशी शब्द का क्या मतलब है- हर व्यक्ति की खुशी का राज अलग-अलग है जैसे किसी को घूमना पसंद है, किसी को दोस्तों के बीच रहना पसंद है ,कोई परिवार के साथ खुश है तो कोई अपने काम में ही खुश है ।

जब हम जीत जाते हैं सफल होते हैं तब हम खुश रहते हैं। हार या असफल होने पर दुखी हो जाते हैं खुश नहीं होते ।क्योंकि आज तक हम इन्हीं भाव से खुश हुए हैं। हमारे आसपास माहौल भी जब तक हमारे मन का हो तो हम खुश वरना नाखुश है। इन्हीं चीजों/ परिस्थितियों में खुश रहना यह सब हम ही ने मन को सिखाया है।

अब हमारा मन भी उसी प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देता है। हम यह क्यों नहीं सोचते कि आज हम प्रतियोगिता में हार गए तो क्या प्रतिस्पर्धी की जीत पर भी तो खुश हो सकते हैं पर नहीं। हमें तो अपने स्वार्थ और अपना हित ही सर्वोपरि दिखाई देता है। सुख- दुख जीवन के दो अभिन्न अंग है। मन को खुश रखना अनिवार्य है।

यदि हम मन को खुश नहीं रखेंगे तो हम अपना जीवन कैसे व्यतीत करेंगे। खुशी से ही हम अपने जीवन में नई उमंग और ऊर्जा का संचार कर सकते हैं ।

बाहर की परिस्थिति चाहे कैसे भी हो हम अपने अंदर के आनंद और खुशी को कैसे बरकरार रख सकते हैं?

आइए हम अपने जीवन में इन 10 मन को खुश रखने के उपायों का समावेश अपनी दिनचर्या में करेंगे तो हमें निश्चित रूप से लाभ होगा:

1. योग (Yoga):

रोगों से मुक्ति और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग बहुत ही आवश्यक है। चूँकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ एवं खुशहाल मन का वास होता है ।योगा करने से शरीर की मांसपेशियों में लचीलापन आता है एवं ग्रंथियों के स्राव संतुलित होते हैं। हैप्पीनेस(Happiness)वाले हारमोंस रिलीज होते हैं शरीर और मन में खुशी की लहर दौड़ती है। सवेरे टहलने से तरोताजा महसूस होता है।

2. ध्यान (Meditation):

ध्यान का प्रयोग भारत में प्राचीन काल से किया जाता है। ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। रोज के 10 मिनट के ध्यान से भी आपको आनंद की प्राप्ति होगी। जब हम ध्यान में बैठते हैं तो बहुत सारे विचार आते हैं, मन बहुत चंचल होता है।अभ्यास करते रहने से इन विचारों में कमी आ जाती है, जैसे जैसे अभ्यास बढ़ता जाता है ,हम ध्यान की गहराई मैं पहुंच जाते हैं, एकाग्रता का विकास होता है, क्रोध में कमी आती है और मानसिक संतुलन बढ़ता है।

सबसे महत्वपूर्ण किसी बात या स्थिति/परिस्थिति को देखने का नजरिया भी बदल जाता है अर्थात जिस स्थिति से हमारा मन नाखुश या दुखी होता था, ध्यान करने से अब हमें उतना दुख या आघात नहीं लगा मानो हमें कोई दूसरा रास्ता मिल गया या हमने कोई दूसरा विकल्प ढूंढ लिया। हम पहले की तरह निराश नहीं हुए हैं। इससे हमारा मन धीरे-धीरे खुशी की तरफ बढ़ता जाता है। हर परिस्थिति में सम रहना सीख जाते हैं ।

ध्यान में एक अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है। मन की एकाग्रता से आने वाली शांति को पाने का रास्ता है ध्यान।

3. लंबी-गहरी श्वास (Deep breathing):

श्वास पर ध्यान केंद्रित करें और लंबी सांस ले और लंबी श्वास छोड़े। इससे मन की एकाग्रता सधती है। 10 बार श्वास -प्रश्वास करने से शांति एवं खुशी का अनुभव होता है।

गहरी लंबी श्वास का प्रयोग बंद कमरे में ना करें।

4. सकारात्मक बने (Be positive):

हम जैसा सोचते हैं वैसा ही होता है यही लॉ ऑफ अट्रैक्शन(Law of Attraction)है ।

कोई भी व्यक्ति अन्य लोगों से ज्यादा सक्सेसफुल(Successful)होता है तो वह सिर्फ सकारात्मक सोच की वजह से। सकारात्मक सोच ही सकारात्मक परिणाम देती है। मन की संतुष्टि ही मन की खुशी है।

5. दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं:

जब हम परिवार या दोस्तों के बीच रहते हैं तो किसी ना किसी बात पर हंसी ठहाके चलते ही रहते हैं। उस समय हमारे मन में किसी भी बात को लेकर कोई चिंता या तनाव नहीं होता। तनाव रहित जीवन ही मन को खुशहाल रखता है तो फिर देर किस बात की फोन उठाओ और परिवार जन या दोस्तों से बात करो जिनसे बहुत दिनों से बात नहीं हुई ,कुछ उनकी सुनो- कुछ अपनी सुनाओ, खुशी मिलेगी।

6. भूलना सीखें:

किसी ने हमें अच्छे शब्द कहे हो, तारीफ की हो हमें याद रहते हैं ,पर थोड़े समय के लिए ।यदि अगर किसी ने निंदा या बुराई की हो तो हम उसे जीवन पर नहीं भूलते हैं। यह सोच- सोच कर हम अपने आप को ही बार-बार दुख पहुंचाते हैं। इस विचार धारा मे बदलाव करते हैं ,जब कोई हमारे बारे में कुछ गलत बोलता है तो क्यों ना हम उन शब्दों या उसकी बातों को भूल जाए। भूल जाने से मन में किसी के प्रति कड़वाहट नहीं रहती, मन निर्मल रहता है ।साफ मन में ही खुशी का वास होता है ।

जीवन आज है, इस पल में है, वर्तमान में जीना सीखिए जैसे बच्चों पर डांट या कट्टी बट्टी का कोई असर नहीं होता वह आपस में एक होकर साथ में खेलते रहते हैं ठीक उसी प्रकार हम भी सब भूलकर एक साथ समय बिताएं।

7. व्यस्त रहें:

व्यस्त रहने का यह मतलब नहीं कि आप दिनभर कामों में लगे रहें ।व्यस्त रहने का अर्थ है आप आपके मन को अपनी रुचि अपने शौक को बढ़ाने या सीखने में लगाए। आप जितना अपने पसंदीदा शौक को पूरा करेंगे, सीखेंगे तो आपका मन खुश रहेगा और क्या पता आप अपने मन की करते-करते आत्मनिर्भर भी बन जाए। व्यस्त रहेंगे तो बहुत सारी जानकारियों से अवगत रहेंगे ,अपडेट (Update) रहेंगे और नए जमाने के साथ बढ़ते रहेंगे।

8. मुस्कुराते रहिए:

परिस्थिति चाहे जैसे हो, चेहरे पर एक मुस्कान सजी रहने से हर मुश्किल आसान लगने लगती है। हंसने से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन होता है जो मस्तिष्क द्वारा रिलीज होता है। इससे अच्छी नींद आती है और मानसिक आनंद की अनुभूति होती है। मानसिक आनंद में ही मन को शांति ,खुशी मिलती है।

👉प्रेरणादायक लोगों के साथ समय बिताएं या ऐसी कहानियों को पढे या सुने जिससे आप प्रेरित हो।

👉 दूसरे लोगों की बातों का बुरा मान कर खुद को नाराज मत करें।

👉बच्चों के साथ समय बिताएं।

👉प्रकृति(Nature) के साथ रहे। घंटों का समय निकल जाएगा पता ही नहीं चलेगा।

9. प्रशंसा करें:

दूसरे लोगों की अच्छी बातों पर ध्यान दें ,उनकी प्रशंसा करें, अच्छा लगेगा।

10. मदद करें:

दूसरों की मदद करने से बहुत अच्छा फील होता है। दूसरों के साथ अपनी भी मदद करें। अपने गलत फैसले, गलतफहमी ईर्ष्या, कटुता आदि भूल जाए और मन को साफ कर दे।

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मैंने यहां पर अपने शरीर को, मन को खुश रखने के लिए बहुत सारी बातें बताई है। उम्मीद है आपको यह अच्छी लगी होगी। पर यह सार्थक तभी होगी जब आप इसे अपने जीवन में अपनाएंगे। मन को खुश रखना इंसान का पहला कर्तव्य है। आज से ही हम मन को खुश रखे, जीवन को खुशनुमा बनाए।

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